ज्योतिष् की 5 महत्वपूर्ण दशायें

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4 अन्य
महत्वपूर्ण
बाते
हैं
!
ग्रहों
का
गाणांत
या
सर्पदेश
क्राड
में
होना
या
पाप्कर्तरी
में
होना
!
ग्रह
कहीं
मृत्यूभाग
में
तो
नहीं
है
यह
भी
देखना
अनिवार्य
है
!
ज्योतिषी यदि लग्न
कुंडली और विनषोत्तरी
दशा का ही
प्रयोग कर रहा
है है तो
10 प्रतिशत ही सहे
परिणाम की अपेक्षा
रखनी चाहिए ! एक
लग्न लगभग  डेढ़
 घंटे
तक रहती है
! ऐसे मे उसी
विनषोत्तरी दशा अंतरदशा
की सैकड़ों कुंडलियों
का भाग्य एक
नहीं हो सकता
! ऐसे मे नवांस
दशांस चतुरथांस देशक्राड
सप्तांश द्वाड़शांस ये 6 वर्ग
कुंडलियों का अध्ययन
किए बिना कुछ
भी बताया जाना
कठिन है ! इसके
अतिरिक्त ग्रहों की डिग्री
, उनका षड़बल आदि देखना
अनिवार्य है ! 4 अन्य महत्वपूर्ण
बाते हैं ! ग्रहों
का गाणांत या
सर्पदेश क्राड में होना
या पाप्कर्तरी में
होना ! ग्रह कहीं
मृत्यूभाग में तो
नहीं है यह
भी देखना अनिवार्य
है !
ऐसे मे नवांस
दशांस
चतुरथांस
देशक्राड
सप्तांश
द्वाड़शांस
ये
6
वर्ग
कुंडलियों
का
अध्ययन
किए
बिना
कुछ
भी
बताया
जाना
कठिन
है
!
इसके
अतिरिक्त
ग्रहों
की
डिग्री
,
उनका
षड़बल
आदि
देखना
अनिवार्य
है
!
अपनी सारी सफल
राजनीतिक
भविष्यवाणियों
में
मैने
अन्य
सिद्धांतो
के
साथ
ऊपर
दिए
गये
सारे
सिद्धांतों
का
प्रयोग
किया
है
!
चाहे
2008
में
आडवाणी
जी
के
राजयोग
समाप्त
होने
संबंधित
भविष्यवाणी
हो
या
भाजपा
के
दुबारे
सत्ता
में
आने
की
भविष्यवाणी
या
अखिलेश
यादव
के
2012
में
मुख्यमंत्री
बनने
की
 
या हाल में
अमित
शाह
या
योगी
के
संघर्षपूर्ण
राजयोग
की
!
 इसके अलावा
कुछ महत्वपूर्ण दशायें
! जिनको लगाए बिना
मैने आज तक
कोई कुंडली नहीं
देखी ! ऊपर जितने
भी सिद्धांत बतायें
गये हैं यह
तो लगाने अनिवार्य
है ! बिना इनका
प्रयोग किए कोई
भी ज्योतिषी सफल
भविष्यवाणी नहीं कर
सकता ! अपनी सारी
सफल राजनीतिक भविष्यवाणियों
में मैने अन्य
सिद्धांतो के साथ
ऊपर दिए गये
सारे सिद्धांतों का
प्रयोग किया है
! चाहे 2008 में आडवाणी
जी के राजयोग
समाप्त होने संबंधित
भविष्यवाणी हो या
भाजपा के दुबारे
सत्ता में आने
की भविष्यवाणी या
अखिलेश यादव के
2012 में मुख्यमंत्री बनने की
 या
हाल में अमित
शाह या योगी
के संघर्षपूर्ण राजयोग
की ! इसके अलावा
विवाह और संतान
के संबंध में
भविष्यवाणी करने के
लिए कुछ विशेष
सिद्धांत हैं जिन्हें
मैं प्रयोग करता
हूँ ! आने वाले
समय में उनके
विषय में बताऊँगा
! वे दशायें जिनका
मैने उल्लेख किया
है वे हैं
!
योगिनीसभी कुंडलियों
पर लागू
चर दशासभी कुंडलियों
पर लागू ! बिना
इसके मैने पिछले
15 साल से कोई
कुंडली नहीं देखी
! इसके अंदर भी
स्थिर दशा मंडूक
दशा आदि अन्य
दशायें है !
द्विसाप्तपतीसम दशामेरी प्रिय
दशा , संभवतः इसलिए
भी कि मेरी
स्वयं की कुंडली
में भी यह
लागू होती है
! इस दशा का
प्रयोग उन्हीं कुंडलियों पर
होता है जिनके
या तो लग्न
के स्वामी सप्तम
भाव में हो
या सप्तम का
स्वामी लग्न मे
हो !
षष्टिहयानीदशायदि सूर्य
लग्न में हो

चतुर्शीथीसमदशादशमेश दशम भाव
में हो  
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