आज रात 9 बजे इस वैदिक कर्मकांड विधि से ऐसे करें होलिका दहन और पूजन

Share this

आज 20 मार्च 2019 को रात 8 बजकर 50 मिनट तक भद्रा रहेगा उसके बाद रात 9 बजे के बाद करें होलिका दहन एवं पूजन इस कर्मकांड वैदिक विधि से । होली पर्व सारे भारत में हर्षोल्लास का पर्व है, जिसमें छोटे- बड़े का भेद भुलाकर जनमानस एकाकार होकर तरंगित होने लगता है। यह यज्ञीय पर्व है । नई फसल पकने लगती है। उसके उल्लास में सामूहिक यज्ञ के रूप में होली जलाकर नवीन अन्न का यज्ञ करके, उसके बाद में उपयोग में लाने का क्रम बनाया गया है। कृषि प्रधान देश की यज्ञीय संस्कृति के सर्वथा अनुकूल यह परिपाटी बनाई गई है ।

1- भगवान नृसिंह का पूजन-
हाथ में अक्षत पुष्प लेकर- नृसिंह भगवान् का आह्वान मन्त्र बोलें । भावना करें कि दुर्बल, साधनहीन, आदर्शवादियों के समर्थक, समर्थ, सम्पन्न, अनाचारियों के काल भगवान् नृसिंह की चेतना यहाँ अवतरित होकर समाज का कायाकल्प करेंगे ।
मंत्र-
ॐ नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात्॥ ॐ श्री नृसिंहभगवते नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।

2- मातृभूमि पूजन
मृत्तिका पूजन करने के लिए पुष्प, रोली, कलावा, चन्दनादि लसे निम्न मन्त्र बोलते हुए उसकी पूजा करें ।
मंत्र-
ॐ मही द्यौः पृथिवी च न ऽ, इमं यज्ञं मिमिक्षताम्। पिपृतां नो भरीमभिः। ॐ पृथिव्यै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।

3- त्रिधासमतादेवी पूजन
फूल चावल लेकर भावना करें कि पूजन के साथ विषमता को निरस्त करने वाले समत्व भाव का, सबमें संचार हो रहा है ।
मंत्र-
ॐ अम्बेऽअम्बिकेऽम्बालिके, न मा नयति कश्चन ।
ससस्त्यश्वकः सुभद्रिकां, काम्पीलवासिनीम् ॥

4- होलिका दहन करें
अनीति के विनाश की भावना से होलिका दहन करें ।
मंत्र-
ॐ भूर्भुव: स्वर्द्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा ।
तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे ॥

5- क्षमावाणी
सभी लोग अपने- अपने हाथों को अञ्जलिबद्ध करके निम्न मन्त्र बोलते हुए द्वेष- दुर्भाव छोड़ने के रूप में जलांजलि दें और किसी के प्रति भी मन में जो द्वेष- दुर्भाव हों, उसे त्याग दें ।
मंत्र-
ॐ मित्रस्य मा चक्षुषेक्षध्वमग्नयः, सगराः सगरास्थ सगरेण नाम्ना, रौद्रेणानीकेन पात माऽग्नयः। पिपृत माग्नयो गोपायत मा नमो, वोऽस्तु मा मा हि ऽ सिष्ट ॥

6- नवान्न यज्ञ
जलती हुई होली में नवान्न की 11 आहूति प्रदान करें एवं थोड़ा बचाकर उसी का प्रसाद बनाकर सभी को बांट दे ।
मंत्र
ॐ अन्नपतेऽन्नस्य नो, देह्यनमीवस्य शुष्मिणः ।
प्रप्रदातारं तारिषऽऊर्जं, नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ॥

7- भस्म धारण

होलिका की भस्म को मस्तक, कण्ठ, हृदय, भुजाओं में धारण करे और बाद में प्रसाद और जयघोष के बाद पूजन क्रम समाप्त करें ।
मंत्र-
ॐ त्र्यायुषं जमदग्नेः, इति ललाटे ।
ॐ कश्यपस्य त्र्यायुषम्, इति ग्रीवायाम् ।
ॐ यद्देवेषु त्र्यायुषम्, इति दक्षिणबाहुमूले ।
ॐ तन्नोअस्तु त्र्यायुषम्, इति हृदि ॥

********

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *