chaitra navratri : इन 6 नामों का 108 बार उच्चारण मात्र से, मां शेरावाली बना देती है, सारे बिगड़े काम

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चैत्र नवरात्र काल चल रहा है इस अवधि में माता की कृपा पाने के लिए जो भी उपाय किये जाते है, उन्हें अवश्य पूरा कर देती हैं । दुर्गा सप्तशती के 11वे अध्याय में देवताओं की स्तुति से प्रसन्न होकर माँ भवानी ने यह वरदान दिया की जब भी कोई अपने संकटों में मुझे पुकारेगा मैं उनकी रक्षा के लिए तुरंत आ जाउंगी, और माता ने 6 रूपों में अवतार लेकर अपने पुत्रों को संकटों से उबारा है । ऐसी मान्यता हैं कि चैत्र नवरात्र में जो भी माता के इन अवतारों के नामों का 108 बार उच्चारण, या जप कर लेता है, मां उनके सभी सभी बिगड़े कामों को पल भर में बना देती है ।

नवरात्र में किसी भी दिन ब्राह्ममुहूर्त में मां दुर्गा के इन अवतारों के नामों का करें 108 बार उच्चारण-

– मां रक्तदंतिका- मां दुर्गा भवानी ने देवताओं की रक्षा के लिए नंदगोप की पत्नी यशोदा के पेट से जन्म लिया, और विन्ध्याचल पर्वत पर निवास करने लगी, एवं वैप्रचित्त दानव के नाश करने के लिए एक अत्यंत भयंकर रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया था । इस अवतार में माता ने अपने दांतों से दैत्यों को चबाया था, जिससे माता के समस्त दन्त अनार के दानों के रंग की तरह लाल दिखाई देने लगे । तभी से इस अवतार के रूप में माँ दुर्गा को भक्त रक्तदंतिका के नाम से पुकारने लगे ।

– मां शताक्षी- अगला अवतार माँ ने तब लिया जब इस धरा पर 100 वर्षो तक वर्षा नही हुई, तब माँ ऋषि-मुनियों की स्तुति आवाहन करुण पुकार सुनकर प्रकट हुई । इस अवतार में माता अपने सौ नेत्रों के माध्यम से अपने भक्तों को देखा और उनके इस संकट को दूर किया । तभी से इनका नाम ‘शताक्षी’ माता हुआ, अर्थात सौ आँखों से देखने वाली ।

– मां शाकम्बरी देवी- इस अवतार में माता ने 100 वर्षों तक बारिश नही होने पर इस धरती पर जीवन बचाने के लिए माँ शाकम्बरी देवी के रूप में अवतरित हुई, और अपनी अनेकों शाखाओं से भरण पोषण करने लगी जब तक वर्षा नही हो हुई ।

– दुर्गा- इसी अवतार में मां दुर्गा ने दुर्गम नाम के एक दैत्य का संहार कर भक्तों की रक्षा की थी, तभी से माता का नाम दुर्गा पड़ा ।

– मां भीमा देवी- मां भवानी ने ‘भीमा देवी’ के रूप में अवतार लेकर उन राक्षसों का वध किया जो हिमालय में रहने वाले ऋषि – मुनियों को परेशान करते थे, उनकी पूजा में विघ्न डालते थे । राक्षसों का वध कर माता ने ऋषि – मुनियों को सभी संकटों को हर लिया था ।

– मां भ्रामरी माता – जब तीनों लोकों में अरुण नाम के दैत्य का अत्याचार बढ़ने लगे, और जगत में त्राहिमाम होने लगा, ऋषि – मुनियों और देवताओं आवाहन पर उनकी रक्षा करने के लिए माता ने छह पैरों वाले असंख्य भ्रमरों का रूप धारण करके अरुण दैत्य का नाश किया, तभी से मां आद्यशक्ति दुर्गा ‘भ्रामरी माता’ के नाम से पूजी जाने लगी ।

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