नवरात्र आराधना में वास्तु अनुकूल स्थान के लाभ

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हालांकि हिन्दू विचारधारा के अनुसार आराधना पूर्णतया बिना किसी उद्देश्य या कामना के की जानी चाहिए। परन्तु व्यवहारिकता में यह चीज देखने को नहीं मिलती है पूजा या आराधना का उद्देश्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में होता ही है।
आजकल नवरात्र का पावन समय है एवं देश के प्रत्येक भाग में अपनी अपनी विद्यमान पद्वतियों से पूरा आराधना की जाती है। परन्तु यदि आपके निवास का आराधना स्थल वास्तु अनुसार सही दिशा एवं सही स्थान पर है तो आराधना अधिक सार्थक एवं मनोकामना पूर्ण करने वाली होतेी है।

  • उत्तर पूर्व दिशा भगवान शंकर का वास है। भगवान शंकर को देवों के देव कहा जाता है। आपके निवास एवं कार्य स्थल के परिसर में उत्तर पूर्व दिशा का विशेष महत्व है। आपका आराधना स्थल आपके निवास स्थान में उत्तर पूर्व में ही स्थित होना चाहिए। यदि आपका पूजा स्थल वास्तु के अनुसार उचित स्थान पर है एवं दोष रहित है तो आराधक एवं आराध्य के मध्य बिना किसी व्यवधान के तारतम्य बना रहता है।
  • उत्तर पूर्व ईशान वास्तु पुरूष का सिर अर्थात दिमाग होता है। पूरे शरीर का रिमोट या कहें कि नियंत्रण दिमाग से ही होता है व्यक्ति की सोच, विचारधारा एवं अन्य कार्य कलाप ये सब उसके दिमाग या मस्तिष्क पर ही निर्भर है। अतः आप उत्तर पूर्व दिशा को सोच या मानसिक संतुलन का आधार कह सकते हैं।
  • आराधना के लिए यह आवश्यक नहीं है कि आप कितने समय आराधना करते हैं जबकि ये आवश्यक है कि आपने अपने आराध्य को किस स्थल पर स्थापित किया हुआ है एवं आराधना से सम्बन्धित अन्य सामग्रियां भी कहा रखा हुआ है।
  • प्राय देखा गया है कि घरों में पूजाघर के अतिरिक्त अन्य कक्षों में भी आराध्य देव एवं देवियों के चित्र आदि रहते हैं जो कि उचित नहीं है।
  • वैसे तो चहुं दिशाओं में भगवान का वास होता है परन्तु शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा जाता है एवं इसे ओर आराधना घर होने पर आराधना सार्थक नहीं होती है।
  • दक्षिण पश्चिम दिशा में पूजा घर होने की दशा में आपके व्ययों में वृद्धि होगी एवं आप बेवजह में समस्याओं में उलझे रहेंगे।
  • इसके लिए यदि आप वास्तु ज्ञाता से सम्पर्क करें तो वह आपके निवास के अनुसार आराधना घर को व्यवस्थित करायेंगे जो कि आपके जीवन में चहुं विकास एवं प्रसन्नता का प्रसाद देगा।
  • घर में बनाऐं गए पूजा स्थल में कभी भी स्वर्गीय लोगो की तस्वीर नहीं रखनी चाहिऐं, तथा पूजा स्थल में हमेशा देवी-देवताओ की तस्वीर ही लगाऐं मूर्ति कदापि न लगाऐं।
  • घंटी व शंख बजाकर पूजा नहीं करनी चाहिएंे ऐसा सिर्फ सार्वजनिक मंदिर में होता है।
  • पूजा स्थल के पर्दे हमेशा साधारण रंग के हो जैसे की आप अपने कक्ष में या अतिथिकक्ष में प्रयोग करते हो। कभी भी भगवा, केसरिया इत्यादि रंगो का चयन न करे।
  • दक्षिण में जिस घर में पूजा स्थल होता है ऐसे घर में हर वक्त लड़ाई झगड़े होते है तथा उनकी अराधना भी ठीक से नहीं हो पाती तथा परिवार में मतभेद की स्थिति बनीं रहती है।

इस प्रकार आप नवरात्रो के शुभ अवसर पर इन परिवर्तन को अपनाकर घर में सुख शांति ला सकते है।

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