Ketu Gochar 2021: केतु करेंगे नक्षत्र परिवर्तन, जानिये गोचर 2021 का राशियों पर प्रभाव

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2021 में केतु के परिवर्तन का आप पर असर…

साल 2021 का आज पहला दिन है। इस नए साल में कई ग्रहों का नक्षत्र या राशि परिवर्तन होने वाला है। एक ओर जहां 4 जनवरी 2021 को भाग्य के कारक शुक्र राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं, वहीं ग्रहों के इस परिवर्तन की चाल में केतु ग्रह भी शामिल है।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार केतु ग्रह व्यक्ति के जीवन क्षेत्र तथा समस्त सृष्टि को प्रभावित करता है। राहु और केतु दोनों जन्म कुण्डली में काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं। वहीं आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है। कुछ ज्योतिषाचार्यों का ऐसा मानना है कि केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश के शिखर तक पहुँच सकता है। राहु और केतु के कारण सूर्य और चंद्र ग्रहण होता है।

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धार्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिष में केतु ग्रह का महत्व अत्यंत व्यापक माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।

केतु का रत्न लहसुनिया है जबकि इसका रंग भूरा है।

ज्योतिष में केतु ग्रह को एक अशुभ ग्रह माना जाता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि केतु के द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त हों। केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। यह आध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक होता है।

यदि किसी जातक की कुंडली में केतु तृतीय, पंचम, षष्टम, नवम एवं द्वादश भाव में हो तो जातक को इसके बहुत हद तक अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। यदि केतु गुरु ग्रह के साथ युति बनाता है तो व्यक्ति की कुंडली में इसके प्रभाव से राजयोग का निर्माण होता है। यदि जातक की कुंडली में केतु बली हो तो यह जातक के पैरों को मजबूत बनाता है। जातक को पैरों से संबंधित कोई रोग नहीं होता है। शुभ मंगल के साथ केतु की युति जातक को साहस प्रदान करती है।

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ज्योतिष में राहु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन, धनु केतु की उच्च राशि है, जबकि मिथनु में यह नीच भाव में होता है। वहीं 27 रुद्राक्षों में केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र का स्वामी होता है। यह एक छाया ग्रह है। वैदिक शास्त्रो के अनुसार केतु ग्रह स्वरभानु राक्षस का धड़ है। जबकि इसके सिर के भाग को राहु कहते हैं।

दरअसल साल 2021 में केतु का गोचर किसी भी राशि में नहीं हो रहा है, लेकिन वह नक्षत्र परिवर्तन करेगा। साल 2021 की शुरुआत में जहां केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे, वहीं इसके बाद 2 जून को शनि ग्रह के नक्षत्र अनुराधा में प्रवेश कर जाएगा। केतु के इस परिवर्तन का सभी राशियों पर असर भी देखने को मिलेगा।

केतु के 2021 में परिवर्तन का राशियों पर असर…

1. मेष राशि :
सेहत के प्रति सचेत रहें। जमीन-जायदाद से जुड़े लंबित मामले हो सकते हैं। धन हानि हो सकती है।

2. वृषभ राशि:
व्यापारियों के लिए यह गोचर शुभ साबित होगा। सरकारी विभागों में लंबे समय से टल रहे कार्य पूरे हो सकते हैं। लेकिन, वैवाहिक जीवन परेशानियों से घिर सकता है।

3. मिथुन राशि:
जीवन साथी से कुछ मतभेद हो सकते हैं। लेकिन व्यापार आदि के लिए यह गोचर अच्छा रहेगा।

4. कर्क राशि:
आय के साधन बढ़ेगे। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। नए दंपत्ति को संतान प्राप्ति के योग बन सकते हैं। छात्रों के लिए नए गोचर शुभ साबित होगा।

5. सिंह राशि:
मित्रों व रिश्तेदारों की ओर से शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। लेकिन, पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव के बीच आर्थिक परेशानियां आपको घेर सकती हैं।

6. कन्या राशि:
आर्थिक मामलों में यह गोचर इस राशि के जातकों के लिए वरदान साबित होगा। आपके द्वारा लिए गए फैसलों की सराहना होगी। जिद या आवेश में कोई भी फैसला लेने से बचें। रिश्तेदार या छोटे भाइयों से मतभेद की संभावना है।

7. तुला राशि:
अचानक धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं। खर्च पर कंट्रोल करें वरना आर्थिक तंगी का शिकार हो सकते हैं। झगड़े-विवाद की संभावना।

8. वृश्चिक राशि:
कार्यक्षेत्र और व्यापार में उन्नति के साथ ही प्रमोशन के योग बन रहे हैं। उच्चाधिकारियों संग संबंध मधुर हो सकते हैं। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का निपटारा हो सकता है।

9. धनु राशि:
आर्थिक तंगी से बचें। खर्च की अधिकता रहेगी। विदेशी कंपनियों में सर्विस या नागरिकता के लिए आवेदन करना सफल हो सकता है।

10. मकर राशि:
इस गोचर के दौरान मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ ही नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। बिगड़े काम बन सकते हैं।

11. कुंभ राशि:
इस गोचर के दौरान शुभ लाभ की प्राप्ति होगी। वाहन या मकान खरीदने का संकल्प पूरा हो सकता है। विदेश यात्रा का योग बन सकता है।

12. मीन राशि:
संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। कई बार आपके कार्य होते-होते रुक जाने के चलते आप निराश हो सकते हैं। उचित होगा आप ऊर्जा शक्ति को बरकरार रखें और जब तक कार्य पूरा न हो जाए तब तक कोशिश करते रहिए।

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